Pradosh Vrat 2026: नए वर्ष की शुरुआत करें प्रदोष व्रत से, पूरा साल रहेगा शिव कृपा से मंगलमय

Pradosh Vrat January 2026 जैसे ही हम नए साल 2026 में प्रवेश करेंगे, भगवन शिव की आराधना के लिए सबसे पहले प्रदोष व्रत की तिथि 1 जनवरी 2026 को पड़ रही है। यह गुरु प्रदोष व्रत है, जो नए साल की शुरुआत में शिव जी की कृपा पाने का श्रेष्ठ समय माना जाता है।
नया साल हर व्यक्ति के जीवन में नई उम्मीदें, नए संकल्प और नई शुरुआत लेकर आता है। हम सभी चाहते हैं कि आने वाला वर्ष सुख, शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि से भरा हो। ऐसे में यदि नए वर्ष की शुरुआत प्रदोष व्रत जैसे पवित्र और फलदायी व्रत से की जाए, तो पूरा वर्ष भगवान शिव की कृपा से मंगलमय बन सकता है।
प्रदोष व्रत क्या है?
प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित एक अत्यंत शुभ व्रत है। यह व्रत हर महीने की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। त्रयोदशी की संध्या का समय, जिसे प्रदोष काल कहा जाता है, भगवान शिव की पूजा के लिए सबसे श्रेष्ठ माना गया है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष काल में भगवान शिव अपने भक्तों की मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण करते हैं।
नए वर्ष में प्रदोष व्रत का महत्व
नए साल की शुरुआत में प्रदोष व्रत रखने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, यह व्रत पुराने वर्ष की नकारात्मकता को दूर कर नए साल में शुभता और शांति लाता है, कार्यों में सफलता और उन्नति प्रदान करता है तथा पारिवारिक और वैवाहिक जीवन में मधुरता और संतुलन बनाए रखता है।
इसलिए कहा जाता है कि नए वर्ष का पहला प्रदोष व्रत पूरे साल को शुभ दिशा प्रदान करता है।
प्रदोष व्रत की पौराणिक कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के समय जब विष निकला, तब संपूर्ण सृष्टि को बचाने के लिए भगवान शिव ने उस विष का पान किया। यह घटना प्रदोष काल में हुई थी। विष को कंठ में धारण करने के कारण भगवान शिव नीलकंठ कहलाए।
इस महान त्याग के कारण प्रदोष काल में की गई पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है।
प्रदोष व्रत के प्रकार
जिस दिन प्रदोष व्रत पड़ता है, उसके अनुसार उसका विशेष फल माना गया है:
- सोम प्रदोष (सोमवार) – स्वास्थ्य और मानसिक शांति के लिए
- भौम प्रदोष (मंगलवार) – साहस और शक्ति के लिए
- बुध प्रदोष (बुधवार) – बुद्धि और ज्ञान के लिए
- गुरु प्रदोष (गुरुवार) – धन और समृद्धि के लिए
- शुक्र प्रदोष (शुक्रवार) – वैवाहिक सुख और प्रेम के लिए
- शनि प्रदोष (शनिवार) – बाधा निवारण के लिए अत्यंत प्रभावशाली
प्रदोष व्रत की पूजा विधि
प्रदोष व्रत की पूजा विधि के अनुसार प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं और पूरे दिन उपवास रखते हुए सात्विक विचार बनाए जाते हैं। संध्या के समय शिवलिंग की स्थापना कर प्रदोष काल में उस पर जल, दूध, दही, शहद और घी अर्पित किया जाता है। इसके साथ बेलपत्र, पुष्प, फल, दीपक और धूप चढ़ाकर “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप किया जाता है तथा प्रदोष व्रत कथा सुनी या पढ़ी जाती है। अंत में शिव आरती कर व्रत का पारण किया जाता है।
प्रदोष व्रत में क्या खाएं?
व्रत के दौरान फल, दूध, दही और सूखे मेवे का सेवन किया जा सकता है, जबकि यदि पूर्ण उपवास संभव न हो तो सात्विक भोजन लिया जाता है। इस दिन प्याज, लहसुन और अनाज से परहेज किया जाता है तथा कुछ श्रद्धालु निर्जल व्रत भी रखते हैं।
प्रदोष व्रत के लाभ
- जीवन से कष्ट और बाधाएं दूर होती हैं
- ग्रह दोषों से राहत मिलती है
- मानसिक शांति और आत्मबल बढ़ता है
- धन, स्वास्थ्य और सौभाग्य की प्राप्ति होती है
यदि आप चाहते हैं कि नया वर्ष सुख, समृद्धि और शांति से भरा रहे, तो उसकी शुरुआत प्रदोष व्रत से अवश्य करें। यह व्रत न केवल आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करता है, बल्कि जीवन को सही दिशा भी देता है। सच्चे मन और श्रद्धा से किया गया प्रदोष व्रत पूरे साल भगवान शिव की कृपा बनाए रखता है।
हर हर महादेव!